Vitamin D

विटामिन डी एक विटामिन है जो हमारे शरीर के लिए आवश्यक होता है, विशेष रूप से हड्डियों और दांतों के लिए। पिछले कुछ वर्षों में, विटामिन डी का महत्व कुछ अध्ययनों के बाद सामने आया है। यहां हम विटामिन डी के बारे में कुछ मुख्य जानकारी देंगे:

  1. विटामिन डी क्या है: विटामिन डी एक विटामिन है जो धूप की किरणों से उत्पन्न होता है। यह शरीर में कैल्शियम और फॉस्फोरस के अवशोषण में मदद करता है, जो हड्डियों की बनावट के लिए आवश्यक होते हैं।
  2. स्रोत: विटामिन डी के स्रोत धूप वाले क्षेत्रों में जीवों के मांस में, मछली में, अंडों में और धूप में सूखाने से बनी खादियों में होता है।
  3. कैल्शियम अवशोषण: विटामिन डी शरीर में कैल्शियम अवशोषण में मदद करता है, जो हड्डियों के विकास और धातुओं के अन्य कामों के लिए आवश्यक होते हैं।
  4. अभाव: विटामिन डी की कमी अस्थिमज्जा की बीमारी के संदर्भ में काफी आम है।
  5. दैनिक आवश्यकता: स्तनपान कराने वाली महिलाओं को दिन में 5000 मीटरिक इकाई (IU) की आवश्यकता होती है, जबकि सामान्य रूप से लोगों को 600-800 मीटरिक इकाई प्रतिदिन की आवश्यकता होती है।
  6. सुरक्षा: विटामिन डी आसानी से रसायनिक रूप से अधिक मात्रा में लिया जा सकता है, लेकिन यह धातुओं के प्रवाह को नुकसान पहुंचा सकता है और लम्बे समय तक हानिकारक भी हो सकता है।

इसलिए, विटामिन डी की आवश्यकता के बारे में अपने चिकित्सक से परामर्श करना आवश्यक है। वे आपको सही सलाह देंगे कि आप अपनी आवश्यकताओं के अनुसार कितनी मात्रा में विटामिन डी लेने के लिए खाद्य सामग्री या उपयोगिता विटामिन डी विलेयों को प्राप्त करें।

Vitamin C

विटामिन सी एक प्रकार का विटामिन है जो शरीर के लिए बहुत जरूरी होता है। विटामिन सी के कई फायदे होते हैं जैसे कि स्किन को सुंदर बनाना, इम्यून सिस्टम को मजबूत करना, एंटीऑक्सिडेंट की भूमिका निभाना और कैंसर जैसी बीमारियों से लड़ने के लिए रोग प्रतिरोधक शक्ति को बढ़ाना।

विटामिन सी कई तरह के फलों और सब्जियों में मिलता है, जैसे कि आम, संतरा, नींबू, अमरूद, नाशपाती, शिमला मिर्च आदि। विटामिन सी का सेवन विभिन्न तरीकों से किया जा सकता है, जैसे कि फलों को खाना, जूस पीना, विटामिन सी युक्त सपोर्ट्स का सेवन करना आदि।

विटामिन सी की कमी बढ़ी हुई उम्र, धूप, धुम्रपान आदि कारणों से शरीर में हो सकती है। इसलिए, विटामिन सी की कमी को पूरा करने के लिए दवाओं का सेवन भी किया जा सकता है, लेकिन सबसे अच्छा तरीका यह है कि आप अपनी आहार में विटामिन सी की मात्रा बढ़ाएं।

vitamin B

विटामिन बी हा विटामिन समूह आहे ज्यामुळे आपल्याला उत्तेजित व ऊर्जावान महसूस करण्यास मदत होते. याच्या फायद्यांमधील एक अन्य बाब या विटामिन समूहात आहे की ते आरोग्याच्या सर्व अंगांच्या प्रक्रिया सुधारित करते. विटामिन बी समूहात समाविष्ट दहा प्रकारचे विटामिन आहेत. ते आहेत B1 (थायमिन), B2 (रिबोफ्लाविन), B3 (नायासिन), B5 (पॅंथोटेनिक अॅसिड), B6 (पायरिडोक्सीन), B7 (बियोटीन), B9 (फोलिक अॅसिड) आणि B12 (कॉबाल्टमधील विटामिन).

हे विटामिन समूह अनेक मानव अंगांच्या स्वस्थ राहण्यासाठी ताकद आहेत. ते सुधारीत प्रक्रिया म्हणजे आसवेची उत्पत्ती, आणि स्थूलतेची उत्पत्ती, त्वचेचा आणि कांद्याच्या खोलांचा स्वस्थ देखभाल तसेच बाकी जणांच्या अंगांची स्वस्थ राहण्यास मदत होते. विटामिन बी मिळताना जेवण, गायचे दूध, अंडे, मासे, भाज्या व पुस्तकाला फसवणूक केलेल्या जवसाच्या अंकुरांना मध्येही मिळते.

vitamin A

विटामिन ए, जिसे रिटिनेल अल्कोहल भी कहा जाता है, एक विटामिन है जो शरीर के विभिन्न अंगों जैसे आँखें, त्वचा, श्वसन तंत्र के लिए आवश्यक होता है। इस विटामिन का प्राप्त होना आवश्यक है क्योंकि इससे रक्तशोधन होता है और हृदय स्वस्थ रहता है। इसके अलावा, यह बांझपन को रोकने में काम आता है और बच्चों में विकास के लिए आवश्यक होता है।

vitamin

विटामिन एक पोषक तत्व है जो शरीर के स्वस्थ विकास और कार्यक्रमों के लिए आवश्यक होता है। इन निम्नलिखित विटामिनों का शरीर में महत्वपूर्ण भूमिका होती हैं:

  1. विटामिन ए (Vitamin A): यह आँखों, त्वचा, मटरिका और लकड़ी का विकास करने में मदद करता है।
  2. विटामिन सी (Vitamin C): अंगूर, संतरे, टमाटर और आम में पाया जाता है। यह शरीर के रोगों से लड़ने के लिए उत्तम होता है।
  3. विटामिन डी (Vitamin D): विटामिन डी खाने के रूप में नहीं, बल्कि सूरज की किरणों के माध्यम से शरीर में उत्पन्न होता है। यह हड्डियों और दांतों के विकास के लिए महत्वपूर्ण होता है।
  4. विटामिन ई (Vitamin E): यह ऊष्मा तत्व होता है जो शरीर के कोशिकाओं को बचाता है।
  5. विटामिन क (Vitamin K): विटामिन क रक्त घनत्व के लिए आवश्यक होता है।

इन विटामिनों को सबसे अधिक जैविक ज्ञान के साथ अवश्य ले। विटामिन खुराक व्यक्ति के उम्र, लिंग, स्वस्थ आहार और व्यायाम की आवश्यकताओं के आधार पर निर्धारित की जाती है।

Vitamin

• व्याख्या : 

• शरीराच्या योग्य वाढ, विकास आणि निगेसाठी अति आवश्यक असणारी सेंद्रिय संयुगे म्हणजे जीवनसत्त्व होय. 

सर्व सजीवांच्या वाढीसाठी कर्बोदके, मेद, प्रथिने आवश्यक असतात. या कार्बनी पदार्थांव्यतिरिक्त काही विशिष्ट कार्बनी संयुगांची अल्प प्रमाणात आवश्यकता असते. या संयुगांची त्रुटी निर्माण झाल्यास सजीवांची वाढ खुंटते. तसेच त्यांना काही विकार उद्भवतात. अशा कार्बनी संयुगांना जीवनसत्त्वे म्हणतात. अन्नातील विशिष्ट घटकांच्या त्रुटीमुळे विकार उत्पन्न होतो, हे बेरीबेरी विकारासंबंधी झालेल्या संशोधनातून (१८९३ – ९७) क्रिस्तीआन आइकमान या वैज्ञानिकाच्या लक्षात आले. या संशोधनासाठी त्यांना नोबेल पुरस्कार देण्यात आला. १९१२ मध्ये कॅसिमिर फून्क या वैज्ञानिकाने या संयुगांना व्हिटॅमिन्स हे नाव दिले.

शरीराला जीवनसत्त्वे ही अल्प प्रमाणात लागतात. शरीरातील चयापचय क्रियांमध्ये विकरांबरोबर जीवनसत्त्वे सहविकर व गतिवर्धक म्हणून भाग घेतात. वनस्पतीत बहुतेक सर्व जीवनसत्त्वांची अथवा त्यांच्या पूर्वगामी संयुगांची निर्मिती होते. याउलट सर्व प्राण्यांना जीवनसत्त्वांसाठी आपल्या आहारातील अन्नघटकांवर अवलंबून राहावे लागते. अन्नघटकांप्रमाणे जीवनसत्त्वांचे पचन होत नाही. मात्र ती जठर आणि लहान आतडयात शोषली जातात. त्यानंतर ती गरजेनुसार शरीराच्या भागांत अभिसरण संस्थेदवारे नेली जातात. जीवनसत्त्वांचे स्निग्ध पदार्थात विरघळणारी मेदविद्राव्य व पाण्यात विरघळणारी जलविद्राव्य असे गट केले जाते. अ, ड, ई, के ही मेदविद्राव्य आणि ब, क ही जलविद्राव्य जीवनसत्त्वे आहेत.